FDI क्या होता है | इसके फायदे और नुकसान

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Foreign Direct Investment ( फॉरेन प्रत्यक्ष निवेश) FDI जिसका अर्थ है जिसमे एक देश की कंपनी दूसरे देश की कंपनी में अपने निवेश करती हैं। इस निवेश से निवेशकों को दूसरे देश की कंपनी में हिस्सेदारी प्राप्त हो जाती है चाहे वह कोई सरकारी प्रोजेक्ट में हो या किसी निजी कंपनी में निवेश हो।

सरल शब्दों में कहें तो एक तरह से विदेशी व्यापार में पर्याप्त हिस्सेदारी हासिल करना और उस विदेशी व्यापार के संचालन को नई दिशाओं में फैलाना है। FDI को सबसे बड़ा बढ़ावा मिला ग्लोबलाइजेशन के आने से जिससे ज्यादातर देशों के व्यापार बढ़े है और आर्थिक विकास में एक मुख्य चालक बना है।

FDI का सबसे बड़ा फायदा अंतरराष्ट्रिय आर्थिक एकीकरण(International Economic Integration) को हुआ है। इसे इस प्रकार से समझा जा सकता है जब दो देशों में निवेश बढ़ते हैं तो व्यापार की रुकावटें कम होती हैं

अथवा सरकार की राजकोषीय नीति (Fiscal policy) जो की सरकार की टैक्स पॉलिसी और सरकार के खर्चो से जुड़ी है उनपर सहमति बनती है। इसका मुख्य फायदा दोनों देश के उत्पादक और उपभोक्ता की लागत को कम करना है

और व्यापार को बढ़ावा देना है। इससे अर्थव्यवस्था में स्थिरता आती हैं और दो देश (या सभी देशों जो व्यापार में सम्मिलित है) के आपसी संबंध मजबूत होते हैं। 

FDI विदेशी निवेशक को घरेलू व्यापार में नियंत्रण की शक्ति प्रदान करता है तथा प्रबंधन में भी अधिकार देता है। निवेशक सबसे पहले तो ये देखते हैं की ऐसी खुली अर्थव्यस्था 

  • जहाँ कुशल कार्यबल, 
  • विकास की संभावना ज्यादा
  • सरकारी विनियमन कम से कम हो
  • अंतरराष्ट्रीय समझौते
  • निजीकरण नीतियां और 
  • राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक स्थिरता।

इसलिए तो FDI केवल पूंजी निवेश ही नही है बल्कि इसमें प्रबंधन का प्रावधान, तकनीक और उपकरण भी शामिल है। यही मुख्य विशेषता है की FDI से विदेशी व्यापर को प्रभावी नियंत्रण प्राप्त होता है और घरेलू व्यापार में  ज्ञान, तकनीक, रोजगार और कौशल प्रदान करने में सहायक होता है।

The Organisation for Economic Co-operation and Development (OECD),जिसमे 37 लोकतंत्रीय सदस्य देश आपसी सहमति से आर्थिक और सामाजिक नीतियां बनाते हैं।

यह एक महत्वपूर्ण संगठन है।OECD के जारी दिशा निर्देश के अंतर्गत FDI के लिए कम से कम 10% की साझेदारी प्राप्त होनी चाहिए किसी विदेशी आधारित व्यापार को।

विभिन्न प्रकार के FDI:

  • Horizontal (शेतीज) FDI: FDI एक सीमा पार निवेश है और जैसा कि नाम से प्रतीत होता है वो निवेश जिसमे विदेशी उत्पादन के उत्पाद घरेलू उत्पादन के उत्पाद एक जैसे हो। सरल शब्दों में कहें तो घरेलू और विदेशी का कॉमन उत्पादों में निवेश करना।
  • Vertical FDI: इसके अंतर्गत विदेशी निवेश अलग अलग उत्पादों में और विभिन्न देशों में करा जाता है।

FDI के फायदे:

  • FDI आर्थिक विकास में सहायक है। निवेशक देश के साथ साथ निवेश प्राप्तकर्ता देश भी क्योंकि यह स्रोत है बाहरी पूंजी और राजस्व (रिवेन्यूज) को बढ़ाने का।
  • विकासशील देशों का सबसे बड़ा कारण FDI को मंजूरी देने का इसी लिए भी है क्योंकि इससे इंफ्रास्ट्रक्चर में बढ़ोतरी होती है जिसके चलते देश मे ज्यादा से ज्यादा रोजगार का उत्पन्न होना है।
  • रोज़गार के उत्पन्न होने से आय में बढ़ोतरी और राष्ट्र की क्रय शक्ति(purchasing power) बढ़ती है।
  • क्योंकि FDI से प्राप्तकर्ता देश की मानव संसाधन को ज्ञान, तकनीक, रोजगार और कौशल प्रदान होता है इससे देश की मानव पूंजी की स्थिति सुधरती है।
  • वहीं बहुराष्ट्रीय कंपनियों को स्वर्ण अवसर प्राप्त होता है अपने व्यवसाय को अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ाने का।
  • सभी सेवाओं और उत्पादो की गुणवंता में सुधार होता है।

FDI के नुकसान:

  • FDI को मंजूरी देने से आर्थिक विकास की स्थिति सुधरती तो जरूर है पर इसकी अधिक निर्भरता किसी भी देश की अर्थव्यवस्था को गड़बड़ा देती है क्योंकि एक से ज्यादा सरकार का हस्तचेप होता है।

वहीं छोटे और नए व्यवसायों को उचित निवेश न मिल पाने के कारण असफलता देखनी पड़ती है क्योंकि उन्हे आमतौर पर बाहर से आई बड़ी कंपनीज का सामना करना पड़ता है

  • लाभ प्रत्यावर्तन (Profit repatriation) जिसका अर्थ है एक देश की कंपनी दूसरे देश में निवेश करके लाभ कमाए और वापिस अपने देश में उस लाभ को पहुंचाए। इसे पूंजी बहिप्रवाह ( capital outflow) कहते है मेज़बान देश (host country) से।
  • इसी पूंजी बहिप्रवाह के कारण विनिमय दर (Exchange rate) नकारात्मक प्रवाहित होता है। यह एक देश के लिए फायदा तो दुसरे देश के नुकसान का कारण है।

FDI इन इंडिया:

  • 1991 के भारत के Liberalisation,Globalisation, Privatisation रिफॉर्म्स के बाद से FDI को बढ़ावा मिला है। कई क्षेत्रों में आधे या पूर्ण तरीके से FDI को मंजूरी मिली है। 
  • 2019 में भारत टॉप टेन श्रेणी में रहा क्योंकि कुल $49 billion प्राप्त हुए FDI के माध्यम से।
  • शायद यही वजह है कि 2020 में भारत सरकार ने नेशनल एयरलाइन Air India के 100%स्टेक बेचने की मंजूरी दे दी है।
  • हालाकि कुछ छेत्र अभी बाकी है जिनमे FDI को मंजूरी नही मिली है जैसे कि Agriculture,Atomic Energy Generation, Tobacco Industry,Lottery Business etc
  • July 2020 में भारत की Foreign Direct Investment 3269 million रही।

निष्कर्ष:

आज हमने FDI से जुड़े कुछ पहलू के बारे मे जाना। यदि आप इसके बारे मे और जानना चाहते तो आप हमारी यह click करके जान सकते है। अवश्य ही हमे कॉमेंट करके बताये। हम इस विषय पर आर्टिकल जल्द ही लिखेंगे। अन्य जानकारी के लिए visit करे हमारी वेबसाइट- www.capitalgyan.com

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