What is Goodwill? | Goodwill Meaning in Hindi? [2022]

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हेलो फ्रेंड्स आप सभी को मै प्रणाम करता हूँ  कैसे है आप सब आशा करता हूँ आप सभी बिलकुल ठीक होंगे स्वस्थ  होंगे  तो आज हम बात करने जा रहे है। What is Goodwill? (गुडविल क्या है?) Types of goodwill, Goodwill Meaning in Hindi, valuation of goodwill के बारे मे तो बिना किसी देरी के चलते है हमारे विषय की ओर  

Table of Contents

What is goodwill? (गुडविल क्या है?)  

गुडविल एक यश से परिपूर्ण संपत्ति है  जिसको कोई देख नहीं सकता है  ख्याति यानि (goodwill ) एक आकर्षण है  जो ग्राहकों को अपनी और आकर्षित करती है ख्याति कई तत्व पर निर्भर करती है।

जैसे व्यवस्था की और व्यापार की ईमानदारी एक अच्छा नाम अच्छा प्रोडक्ट और उसकी गुणवत्ता इत्यादि। 

ख्याति एक अच्छे नाम और उनके अच्छे संबंधों से प्राप्त होने वाला लाभ आशा करता हूँ की अब आप जान चुके होंगे की गुडविल क्या है अब आगे बढ़ते है।

Goodwill Meaning  in Hindi ( गुडविल को हिंदी में क्या कहते है ) 

गुडविल को  हिंदी में साख कहा जाता है जो कि ग्राहकों को व्यापार से मिलता है और इसी साख से होने वाले लाभ को ख्याति कहते है।  

Goodwill के प्रकार ( Types of goodwill ) 

  • संस्थागत  ख्याति    (institution  goodwill )
  • व्यक्तिगत ख्याति    (personal  goodwill )
  • आकस्मिक ख्याति   (casual  event  goodwill )

 संस्थागत  ख्याति (institution goodwill )

यह  वो ख्याति होती है जो संस्था के उत्पादित  वस्तु की किस्म व्यापार का मान और व्यापारियों से बनती है उस ख्याति को  ही व्यवसायिक संस्थागत ख्याति  कहा जाता है और व्यवसाय मालिक के बदल जाने पर भी व्यवसाय की ख्याति बानी हे रहती है। 

व्यक्तिगत ख्याति (personal goodwill )

यह वो ख्यति  है  जो व्यवसाय करने वाले  मालिकों के विचार व्यवहार गुण  आदि  के कारन होती है

और यह ख्याति व्यक्तिगत ख्याति कहलाती है और जब भी व्यवसाय या मालिक बदलते  तो यह पूर्णतः समाप्त हो जाती है  और इसे इसलिए कुत्ते के प्रकार वाली ख्याति भी कहा जाता है।

आकस्मिक  ख्याति( casual event goodwill )

यह वो ख्याति है जो छोटी मोटी व्यवसाय घटना के साथ बनती और टूटी रहती है ऐसे ख्याति को ही casual event goodwill  यानी आकस्मिक ख्याति कहा जाता है। 

इसका न तो व्यापार से कोई लेनदेन होता है और न ही मालिक से और इस लिए ही इसे चूहे के स्वभाव वाली  ख्याति भी कहा जाता है। 

Goodwill का मूल्यांकन ( valuation of goodwill )

  • जब कोई साझेदार फर्म  में दाखिल हो रहा हो। 
  • जब  कोई साझेदार फर्म  को त्याग रहा हो। 
  • या साझेदार की मृत्यु हो जाने पर।  
  • व्यापार बेचने पर। 
  • साझेदारी में लाभ अनुपात में परिवर्तन परिवर्तन करने पर भी या फर्म से कंपनी में बदलाव पर।  

Goodwill के मूल्यांकन की विधि ( methods of valuation of goodwill ) 

ख्यात एक  शोहरत संपत्ति है अतः इसका कोई सही सही valuation नहीं है ख्याति के मूल्यांकन की मुख्यता व्यवसाय के होने वाले लाभ पर निर्भर है  जो इस प्रकार है। 

1 औसत लाभ  विधि (average profit method )

इसमें कुछ वर्षों के औसत लाभ के अनुसार valuation of goodwill किया जाता है और सुविधा के अनुरूप दो भाग  में विभक्त और स्पष्ट किया जाता है।  

ख्याति = औसत वार्षिक लाभ गुणा वर्षों  की संख्या 

जिसमें एक टर्म का जीकर   है औसत वार्षिक लाभ हम देखते है औसत वार्षिक लाभ को कैसे ज्ञात किया जाता है 

औसत वार्षिक लाभ की गणना (computation of average profit )

औसत लाभ की गणना गत कुछ वर्षों के लाभ के योग से हानि की राशि घटाकर (यदि हो तो )वर्षो की  संख्या से भाग दे कर  हम इसे ज्ञात कर सकते है। 

(क) लाभ की अवधि

1 . औसत लाभ की गणना के लिए कुछ वर्षों के लाभ मुनाफे को आधार मानना सही होता है  यदि अवधि व्यवसाय की प्रकृति एवं आपसी समझौते पर निर्भर करती है या 3 ,या 5  या 7  वर्षों की अवधि इस इस गणना के लिए उपयुक्त मानी  जाती है।  

2 . केवल शुद्ध सम्मिलित करना सकल लाभ नहीं 

औसत लाभ की गणना के लिए प्रत्येक वर्ष का शुद्ध लाभ भी सम्मिलित  किया जाना चाहिए  सकल  लाभ नहीं ‘’सकल लाभ होने  पर व्यापार के  संचालन से संबंधित व्यय विक्रय एवं वितरण संबंधी 

व्यय स्थायी सम्पतियों पर हस्र  कर के लिए आयोजन आदि की राशि घाटकर प्रत्येक वर्ष के लिए पृथक पृथक शुद्ध लाभ की  गणना की जानी चाहिए 

3 .  असाधारण बेताब असाधारण आय का सम्मिलित न होना 

यदी किसी वर्ष के शुद लाभ में  असाधारण व्यय सम्मिलत हो तो उसे शुद लाभ  में जोड़ देना चाहिए और इसके विपरीत असाधारण आय में सम्मिलित होने पर उसे  उस वर्ष के शुद्ध लाभ से  घटा देना चाहिये।

4 . समायोजन 

उपरोक्त अनुसार प्रत्येक वर्ष अलग अलग ज्ञात शुद्ध लाभ की राशि  के  योग करने से किसी वर्ष हानि भी हो  तो हानि की राशि  घटाकर उसे कुल वर्षों की संख्या से भाग देकर औसत लाभ कि गणना की जानी  चाहिए।

उसके बाद ही समायोजन कर औसत वार्षिक मुनाफे हानि लाभ की गणना की जा सकती है।

5 .  व्यवसाय के स्वामी या स्वामियों का पारिश्रमिक

यदि किसी व्यवसाय का  प्रबंध या संचालन कार्य व्यापार के स्वामी के  द्वारा  मुफ्त किया जाये तो औसत लाभ के पारिश्रमिक की  सही राशि को घटा दी जानी चाहिए।

राशि व्यवसाय की योग्यता तथा कार्य क्षमता के अनुसार निश्चित की जानी चाहिए।

6 . भावी आय की संभावना 

यदि भविष्य में व्यवसाय में किसी आय की संभावना हो तो उसे औसत लाभ में सम्मिलित कर लेना चाहिए।  

7 . भावी आय की संभावना

यदि भविष्य में व्यवसाय में किसी व्यय की संभावना हो तो संभावित राशि औसत लाभ में से घटा दिया जाना चाहिए।  

8 ‘ वर्षों की संख्या 

उपरोक्त के अनुसार ज्ञात औसत लाभ को वर्षों  की संख्या से  गुणा कर ख्याति की गणना करनी चाहिए और संख्या का  निर्धारण काम  के प्राकृतिक और अनुमान के अनुसार ही करना चाहिये।   

(खा ) भारित  औसत लाभ विधि 

इस विधि के अंतर प्रत्येक वर्ष के शुद्ध लाभ को एक निश्चित भर से गुणा कर गुणनफल का योग यानी उसका उत्पाद ज्ञात किया  जाता है उसके बाद उसी कुल भार से भाग देकर भारित औसत लाभ को ज्ञात किया जाता है भाजन फल को क्रय किये गए सालों  की संख्या से गुणा कर ख्याति की राशि भी ज्ञात की जाती है।

लाभ में बढ़ोतरी  होने पर साधारण औसत लाभ विधि की तुलना में यह विधि अधिक उपयुक्त मणि जाती है।

अधिलाभ विधि किसे कहते है ? (what is super profit method ) 

इस विधि के अंतर्गत अधिलाभ की राशि का सालो के संख्या से गुना कर  के ख्याति की गणना निचे बातये गए अनुसार  की जाती है। 

ख्याति =अधिलाभ × सालों की संख्या 

Goodwill =super  profit  × number of  years 

 अधिलाभ ( super  profit )

देखा जाये तो आशा किये  मुनाफे की तुलना में कामया  हुआ ज्यादातर यदि फर्म ही अधिलाभ कहलाता है ,,और  इसकी गणना हम  कई  भिन्न तरीको से कर सकते है।

 सामान्य लाभ = औसत  जमा पूंजी × सामान्य दर \100 

Normal profit = average capital employed × normal  rate /100  

यदि फर्म  अधिलाभ की स्थिति  में है  तो ख्याति का सकारात्मक मूल्य  होगा  इसके अलावा यदि फार्म में अधिलाभ की स्थिति न भी हो तो ख्याति का मूल्य नकारात्मक  होगा।

सालों की संख्या – सालो की संख्या का  निर्धारण  व्यापार की स्थिति   सरकारी नीतियों आदि पर  निर्भर  करता  है  इस  संबंध  में  सामान्यतः तीन  या फिर पांच सालों की संख्या सही  मानी  जाती है 

चलिए  एक उदाहरण के  तौर पर समझते है इसे

मान लेते  है की  31 मार्च 2021 एक फर्म  की पूंजी 100000 रुपए  है  उसने  

31  मार्च 2022  को समाप्त  वर्ष के लिए 30000 लाभ अर्जित किया है 

 इस अवधि में औसत फर्म लाभ 17 %की दर  से अर्जित करती है तो  अधिलाभ इस प्रकार होगा   

फार्म का लाभ =30000 

सामान्य लाभ =(100000 × 17 /100 ) = 17000

अधिलाभ = 30000 – 17000 = 13000  

ख्याति का मूल्य = अधिलाभ × क्रय  वर्षों की संख्या {अनुमान लगते है अगर 5  वर्षों का  तो वो होगा 

 [13000 × 5] = 65000 . 

औसत नियोजित पूंजी  की गणना?

जब हम औसत  नियोजित  पूंजी की गणना की लिए व्यापार में लगी सारी पूजी यानी अपनी चल अचल सम्पति ( ख्याति गैर व्यापार सम्पतिया विनियोग और शुरुआती व्यय मुनाफा और

नुकसान का विवरण पत्र की  हानि और उसका अंश और श्रन्पत्रो पर कमीशन ,बाटा आदि को सम्मिलित न करते हुए भी) 

वास्तविक मूल्य यानी बाजार मूल्य और वसूली मूल्य के योग में से अकाल्पनिक और लम्बे समय के श्रण  की राशि  (कंपनी  की दशा में पूर्वाधिकार  के अंश की पूजी की राशि )

को घटाकर व्यापार में नियोजित पूंजी की राशि )  को व्यापार में नियोजित पूंजी की राशि को ज्ञात  कर लिया जाता है। 

इसकी गणना सालो के  शुरुआत के और अंत की पूंजी  के योग को दो से विभक्त कर और वर्षो के अंत की पूजी में चालू  वर्ष का आधा लाभ घटाकर वर्ष की शुरुआत की पूंजी में  चालू वर्ष  का आधा मुनाफा जोड़ कर भी किया जा सकता  है 

सामान्य दर की गणना ?

सामान्य दर वह दर है  जिस व्यवसाय सामान्यतः व्यवसाय से प्राप्त करने की अपेक्षा रखता है  इस दर से कम  लाभ होने पर भी अपना व्यवसाय प्रारम्भ नहीं करते। 

Normal लाभ दर को सोचते हुए समय व्यवसाय की प्रकृति और जोखिम सही प्रबंधकीय और दूसरे संबंधित परिस्थितियों उन्हें जरूर ध्यान  रखना चाहिए। 

और  इसका सही उल्लेख न होने पर इसकी गणना ब्याज की सामान्य  दर और जोखिम के अनुसार दर का योग किया जा सकता है 

Goodwill = अधिलाभ × सालों की संख्या 

और ख्याति = (वास्तविक औसत लाभ – सामान्य  लाभ ) × सालों की संख्या 

और सामान्य लाभ = औसत नियोजित पूंजी × सामान्य दर /100 औसत नियोजित पूंजी = गैर व्यापारिक सम्पतियो को  छोड़कर समस्त वास्तविक सम्पति या  -(बाह्र्य  दायित्व +पूर्वाधिकार अंश पूंजी +चालू वर्ष का  आधा लाभ )

अथवा , (प्रारंभिक पूंजी + अंतिम पूंजी )/2 

एव वर्ष के अंत की पूंजी – चालू वर्ष का आधा लाभ 

अथवा वर्ष के प्रारंभ की पूंजी +चालू  वर्ष का आधा लाभ 

Goodwill के मूल्यांकन की आवश्यकता (need for valuation of goodwill) 

ख्याति का मुद्रा के रूप में मूल्यांकन निम्न परिस्थितियों में  जरूरी है, 

  1. एकाकी व्यापार की स्थिति में  

  •  जब व्यापार का विक्रय  किसी अन्य व्यक्ति को किया जा रहा हो,,,, 
  • जो व्यापार में किसी अन्य व्यक्ति को साझेदार के रूप में शामिल किया जा रहा हो
  • या जो व्यापार को किसी अन्य व्यापार के साथ एकीकरण हो रही हो
  • या जो व्यापार में किसी भाग का विक्रय  हो रहा 
  • अकस्मात्   व्यवसायी की मृत्यु  हो जाने पर संपदा निर्धारण करने पर\

2. साझेदारी व्यापार की स्थिति में

  • नये साझेदार के प्रवेश पर
  • किसी साझेदार के अवकाश लेने पर
  • किसी साझेदार की मृत्यु पर भी 
  • साझेदारी के मुनाफे और नुकसान होने के अनुपात  में बदलाव होने पर फर्म के विघटन पर
  • Partnership फर्म पर एक साथ होने पर
  • साझेदारी फर्म का कंपनी में बदलने पर भी
  • Partnership का सरकार द्वारा  अनिवार्य रूप से अधिग्रहण करने पर। 

3. कंपनी की स्थिति में

  • कंपनी का क्रय विक्रय करने, पर
  • दो या दो से अधिक कंपनी को एक साथ करने पर भी
  • अंश का मूल्यांकन करने पर 
  • उपलिखित  ख्याति का खाता दोबारा खोलने पर
  • सरकार द्वारा कंपनी का निवारण रूप से अधिग्रहण  करने पर

Goodwill को प्रभावित करने वाले तत्व कौन से है?

सामान्यतः, व्यवसाय के विक्रय के समय ख्याति के मूल्यांकन की आवश्यकता होती है किंतु साझेदारी फर्म के संदर्भ में निम्न परिस्थितियों में भी यह आवश्यकता उत्पन्न हो सकती है : 

1. वर्तमान साझेदारों के बीच लाभ विभाजन अनुपात में परिवर्तन

2. नए साझेदार का प्रवेश

3. साझेदार का सेवानिवृत्त होना, इत्यादि

(निष्कर्ष )

आशा करता हूँ की मेरा  द्वारा दी गई जानकारियां  आप सभी  को   इस  विषय के बारे में समझने में  सहायक होगा   और आप सभी को कुछ नया सीखने को मिला  होगा || 

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(FAQ’S ) 

1) गुडविल का अर्थ क्या है 

ख्याति का अर्थ होता है प्रसिद्धि ,शोहरत रुतबा आदि      

2) गुडविल कौन सी संपत्ति  है ?

ख्याति एक बहुमूल्य  सम्पदा है जिस प्रकार आपकी कोई भी सामग्री

3) Goodwill कितने प्रकार की होती है ? 

ख्याति के तीन प्रकार है 

  • संस्थागत ख्याति (institution goodwill ,
  • व्यक्तिगत ख्याति personal goodwill,
  • और आकस्मिक ख्याति casual goodwill  

4) ख्याति को प्रभावित करने वाले तत्व ?

ख्याति को प्रभावित  करने वाले तत्व इस प्रकार है 

नए साझेदार का प्रवेश साझेदार का सेवा निर्वित होना  इत्यादि   .  

5) Goodwill के मूल्यांकन की आवश्यकता ?

जैसे जब कोई साझेदार फर्म को त्याग कर रहा हो 

जब साझेदार की मृत्यु हो जाने पर भी, ख्याति के मूल्यांकन की आवश्यकता होती है। 

6) अधिलाभ विधि किसे कहते है?

अतिरिक्त या विशिष्ट रूप से होने वाले मुनाफे का वह अंश जो हिस्सेदारों को उनके लाभांश के अतिरिक्त खुश  करने के लिये दिया जाता है 

7) goodwill  को हिंदी में क्या कहा जाता है ?

Goodwill  को हिंदी में साख कहते है।

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