Face Value क्या होती है | Face Value In Stock Market | जानिए Hindi में (2022)?

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एक बार फिर हाज़िर हूँ आपके लिए एक और नए विषय को लेकर आज हम चर्चा करने वाले है एक बहुत ही महतवपूर्ण और आपके काम आने वाले विषय के बारे में। तो चलिए  जानते है की हम आपको किस विषय से जोड़ने वाले है आज हम बात करने वाले Face Value क्या होती है | Face Value in stock Market जानिए Hindi में (2022), face value meaning

तो आप को पता लग ही गया होगा की आज की ये चर्चा कितनी  अहम है  तो चलिए शुरू करते है और जनते है इससे जुड़े हुए कुछ प्रश्नो के उत्तर। 

पर सब से पहले ये बताइये की आप में से कितने लोग stocks में निवेश करते है और कितना जानते है इसके बारे में अगर आप चाहे तो मै आपको वो मार्ग बता सकता हूँ  जिसके माध्यम से आप एक सफल निवेशक बन सकते है। 

चलिए आगे बताते है आपको इसके बारे में। 

आखिर क्या है Face Value ?

 दोस्तों फेस वैल्यू वह मूल्य होता हैं जो कंपनी के द्वारा शेयर जारी करते समय निर्धारित किया जाता हैं।  और इसे Par Value के नाम से भी जाना जाता हैं। फेस वैल्यू को हिंदी में अंकित मूल्य भी कहा जाता 

है।

 और जब भी  कोई भी किसी भी प्रकार की  कंपनी IPO के माध्यम से पहली बार अपने शेयर जारी करती हैं तो कंपनी सबसे पहले Face value निर्धारित करती हैं।  ये सब से पेहला काम होता है किसी भी कंपनी का ये फेस वैल्यू एक शेयर की नाममात्र की वैल्यू होती हैं।

और दोस्तों जयादा तर कंपनी अपने shares का दाम फेस वैल्यू से ऊपर ही रखती है क्युकी फेस वैल्यू कभी ऊपर निचे नहीं होती यह हमेशा स्थिर रहती है और फेस वैल्यू का मार्किट से की भी सीधा सम्बन्ध नहीं होता है। 

फेस वैल्यू तय करने का कोई पैमाना नहीं हैं। कंपनी अपनी इच्छानुसार इसे तय करती हैं। जबकि मार्केट प्रीमियम पूर्णतया कंपनी की ग्रोथ, प्रॉफिट और भविष्य पर निर्भर करता हैं। 

हम आशा करते है की आप अच्छे से जान पाए होंगी की फेस वैल्यू क्या है। 

बुक वैल्यू क्या है?

दोस्तों जब किसी कंपनी की बुक वैल्यू (Book Value), कंपनी की कुल चल अचल परिसंपत्तियों यानि की  (एसेट) और उसकी कुल देनदारियों के बीच का शुद्ध अंतर है। बुक वैल्यू कंपनी की परिसंपत्तियों की कुल वैल्यू को प्रदर्शित करती है।

जो की कंपनी के द्वारा  सारी संपत्ति  बेचे जाने के बाद अपने सारे  शेयर्स कंपनी के शेयर धारको को मिल जाती है। 

और किसी भी एसेट की बुक वैल्यू, बैलेंस शीट पर इसे बनाए रखने के बराबर होती है।  और बुक वैल्यू अक्सर किसी कंपनी या किसी एसेट की मार्केट वैल्यू से कम  ही होती है।

बुक वैल्यू का उपयोग

किसी कंपनी की अकाउंटिंग वैल्यू के रूप में, बुक वैल्यू के दो प्रमुख उपयोग हैं:

1. यह कंपनी के एसेट्स की कुल वैल्यू के रूप में काम करती है, जो शेयरधारक  के सिद्धांत रूप में प्राप्त होगा  और जब कंपनी की परिसंपत्तियां बिक जाएंगी।

2. किसी भी  प्रकार की   कंपनी की मार्केट वैल्यू के साथ तुलना करते हुए, बुक वैल्यू संकेत दे सकती है कि स्टॉक का मूल्य निर्धारण वास्तविक मूल्य से अधिक हुआ है या कम हुआ है।

मार्क तो मार्किट क्या है जानते है। 

फ्यूचरर्स कॉन्ट्रैक्ट में मार्क टू मार्केट का मतलब यह है कि जब तक कि आप किसी स्टॉक को स्क्वायर ऑफ नहीं करते है तो स्टॉक के मार्केट प्राइस में उतार- चढाव के कारण रोज़ का फायदा और नुकसान आपके अकाउंट में सेटल किया जाता है। इस प्रोसेस को मार्क टू मार्केट कहा जाता है।

आइए जानते है बुक वैल्यू से जुड़े हुए कुछ तथ्य के बारे में भी। 

चूंकि किसी कंपनी की बुक वैल्यू उसकी शेयरहोल्डिंग के महत्व का प्रतिनिधित्व करती है, यह निर्णय करने का प्रयास करते हुए कि क्या शेयरों का मूल्यनिर्धारण उचित तरीके से किया गया है, बुक वैल्यू की शेयरों की मार्केट वैल्यू के साथ तुलना करना एक कारगर मूल्यांकन तकनीक का कार्य कर सकता है।

बुक वैल्यू और फेस वैल्यू में क्या अंतर है स्पष्ट कीजिये ?

 दोस्तों एक निवेशक को यह समझना जरूरी  है कि बुक वैल्यू और मार्केट वैल्यू के बीच क्या अंतर  होता है ताकि वे तय किया जा सकें कि किसी भी विशेष स्टॉक में निवेश करते समय किस मूल्य पर विचार किया जाए आइए बुक वैल्यू बनाम मार्केट वैल्यू पर एक नज़र डालते है। 

1.  दोस्तों क्या आप जानते है की बुक वैल्यू कंपनी की संपत्ति के वास्तविक मूल्य को दिखाता है और  मार्केट वैल्यू कंपनी या उसकी संपत्ति के अनुमानित मूल्य के निवेशक को सूचित करता है।

2. और  बुक वैल्यू कंपनी की Equity के मूल्य को दर्शाता है परन्तु मार्केट वैल्यू ज्यादातर मूल्य को  दिखाता है जिस पर कंपनी के शेयर का वित्तीय बाजार में कारोबार किया जा सकता है।

3. संपत्तियों का बुक वैल्यू और मार्केट वैल्यू भी उतार-चढ़ाव की आवृत्ति के बारे में विभिन्न विभिन्न प्रकार का   होता है। 

अगर हम बुक वैल्यू बनाम मार्केट वैल्यू देखते हैं, तो बुक वैल्यू  हमे अत्याधिक स्थिर दखाई देता  है  और यह समय-समय पर बदलता है, आमतौर पर जब कंपनी अपनी कमाई की रिपोर्ट करती है। तो  दूसरी ओर, मार्केट वैल्यू, ट्रेडिंग डे के माध्यम से परिसंपत्तियों का कारोबार होने के कारण अक्सर बदलता रहता है।

4. बुक वैल्यू संपत्ति अधिग्रहण की वास्तविक लागत को अंकित करता है, इसके विपरीत मार्केट वैल्यू बाजार के रुझान को दिखाता है।

5. यदि कंपनी किसी संपत्ति को बेचने की योजना बनाती है तो बुक वैल्यू और मार्केट वैल्यू भी इसके उपयोग में काफी भिन्न  प्रकार होते हैऔर बुक वैल्यू केवल संपत्ति के लेखांकन मूल्य को दिखाता है इसके विपरीत मार्केट वैल्यू बाजार में संपत्ति की वर्तमान लोकप्रियता को सही रूप से दिखाता है।

और आप जब भी  निवेश का फैसला करते  है तो उस समय बुक वैल्यू और मार्केट वैल्यू के कार्य को ध्यान में रखें यह आपको यह पता लगाने में मदद करेगा कि क्या संपत्ति का मूल्यांकन, अधिमूल्यांकित, या वास्तविक रूप से मूल्यवान है या फिर नहीं। 

 और अपने  पसंद का निवेश करने और अपनी वित्तीय स्थिरता बनाने के लिए अपने ब्रोकर के संपर्क में रहें ताकि आपको उचित मार्गदर्शन मिलता रहे और आप मार्किट के सभी स्वरुप से भली भांति परिचित रहे। 

(निष्कर्ष)

हम आशा करते है की आप आज के विषय को अच्छे से समझ पाए होंगे और आपको बोहत कुछ जानने और सिखने को मिला होगा और हम जानते है की आपको हमारी पोस्ट पढ़ना अच्छा लगता है और हम चाहते है की आप हमारे साथ बने रहे और capitalgyan के साथ जुड़े ताकि आप और हम मिल कर कई और विषयो पर चर्चा करे एक बार फिर आप सभी का हमारे इस ब्लॉग को पढ़ने का बोहोत धन्यवाद फिर मिलते है एक और रोचक विषय के साथ। 

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